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जप अवधि📜 मंत्र महोदधि — जप काल, धर्म सिंधु, भगवद् गीता (6.16-17)2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान कितनी देर बैठना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

जप अवधि: न्यूनतम 15 मिनट (1 माला)। सामान्य 30 मिनट। साधक 1 घंटा। एक माला पूरी करें — बीच में न उठें। धीरे-धीरे बढ़ाएं। 15 मिनट एकाग्र > 1 घंटा विचलित। नित्यता अवधि से अधिक महत्वपूर्ण।

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विस्तृत उत्तर

जप की अवधि का नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:

भगवद् गीता (6.16-17)

नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।

न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन।'

— न अधिक खाने वाले को, न अत्यधिक उपवास करने वाले को — योग (जप) सिद्ध होता है। संतुलन आवश्यक।

अनुशंसित अवधि

| जप | समय | मनके |

|----|-----|------|

| न्यूनतम नित्य | 15 मिनट | 1 माला (108) |

| सामान्य | 30 मिनट | 2-3 माला |

| साधक | 1 घंटा | 5-7 माला |

| पुरश्चरण | 3-4 घंटे | 25-30 माला |

महत्वपूर्ण नियम

  1. 1जप बीच में न रोकें — एक माला पूरी करें, बीच में उठना नहीं
  2. 2थकान आए तो कम करें — 15 मिनट पूर्ण > 1 घंटा आधा
  3. 3बढ़ाएं धीरे-धीरे — पहले 1 माला, फिर 3, फिर 5

मंत्र महोदधि

जपकाले न किञ्चित् अन्यत् चिंतयेत्।' — जप काल में कुछ और न सोचें — चाहे 15 मिनट ही हो।

आधुनिक व्यावहारिक

व्यस्त जीवन में — प्रातः 15-20 मिनट नित्य जप → 3-6 महीने में स्पष्ट अंतर।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि — जप काल, धर्म सिंधु, भगवद् गीता (6.16-17)
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