विस्तृत उत्तर
जप की अवधि का नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:
भगवद् गीता (6.16-17)
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन।'
— न अधिक खाने वाले को, न अत्यधिक उपवास करने वाले को — योग (जप) सिद्ध होता है। संतुलन आवश्यक।
अनुशंसित अवधि
| जप | समय | मनके |
|----|-----|------|
| न्यूनतम नित्य | 15 मिनट | 1 माला (108) |
| सामान्य | 30 मिनट | 2-3 माला |
| साधक | 1 घंटा | 5-7 माला |
| पुरश्चरण | 3-4 घंटे | 25-30 माला |
महत्वपूर्ण नियम
- 1जप बीच में न रोकें — एक माला पूरी करें, बीच में उठना नहीं
- 2थकान आए तो कम करें — 15 मिनट पूर्ण > 1 घंटा आधा
- 3बढ़ाएं धीरे-धीरे — पहले 1 माला, फिर 3, फिर 5
मंत्र महोदधि
जपकाले न किञ्चित् अन्यत् चिंतयेत्।' — जप काल में कुछ और न सोचें — चाहे 15 मिनट ही हो।
आधुनिक व्यावहारिक
व्यस्त जीवन में — प्रातः 15-20 मिनट नित्य जप → 3-6 महीने में स्पष्ट अंतर।





