विस्तृत उत्तर
ध्यान की अवधि साधक की स्थिति और परंपरा के अनुसार भिन्न होती है।
शास्त्रीय निर्देश
शिव संहिता (3.27): ध्यान की अवधि क्रमशः बढ़ाने का निर्देश — प्रारंभ में 12 श्वास (प्राण) = 1 मात्रा, 12 मात्रा = 1 धारणा, 12 धारणा = 1 ध्यान (लगभग 48 मिनट), 12 ध्यान = 1 समाधि।
भगवद्गीता (6.17): 'युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा।' — संतुलित जीवनशैली वाले को ही योग (ध्यान) फलदायक होता है।
व्यावहारिक मार्गदर्शन (परंपरागत)
- ▸नवीन साधक: 10-15 मिनट
- ▸6 माह अभ्यास: 20-30 मिनट
- ▸1 वर्ष+: 45-60 मिनट
- ▸उन्नत साधक: 2-4 घंटे (ब्रह्म मुहूर्त में)
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पूर्व): शास्त्रों में इस काल को ध्यान के लिए सर्वोत्तम कहा गया है। सात्विक वायु, मन की ताजगी, वातावरण की शांति — सब अनुकूल।
सिद्धांत: अवधि से अधिक गहराई महत्त्वपूर्ण है। 15 मिनट का गहरा ध्यान, 1 घंटे के उथले ध्यान से श्रेष्ठ है।





