विस्तृत उत्तर
पंचदेव पूजा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित स्मार्त परंपरा का मूल अनुष्ठान है।
पंचदेव (पांच देवता)
- 1शिव — संहारकर्ता, योगेश्वर
- 2विष्णु — पालनकर्ता
- 3गणेश — विघ्नहर्ता
- 4सूर्य — प्रत्यक्ष देव
- 5देवी (दुर्गा/शक्ति) — आदिशक्ति
शंकराचार्य का उद्देश्य
उस समय हिंदू धर्म में शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, सौर — अनेक सम्प्रदाय आपस में विवाद करते थे। शंकराचार्य ने पंचदेव पूजा स्थापित कर सभी सम्प्रदायों को एकत्र किया — पांचों देवता एक ही ब्रह्म के रूप हैं।
कैसे करें
- 1प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थान पर बैठें।
- 2पांचों देवताओं की मूर्ति/तस्वीर रखें।
- 3सभी को जल, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- 4प्रत्येक देवता का मंत्र जपें:
- ▸*'ॐ नमः शिवाय'*
- ▸*'ॐ नमो नारायणाय'*
- ▸*'ॐ गं गणपतये नमः'*
- ▸*'ॐ सूर्याय नमः'*
- ▸*'ॐ दुं दुर्गायै नमः'*
- 1आरती करें।
महत्व: पंचदेव पूजा = सम्पूर्ण हिंदू धर्म की पूजा एक साथ। कोई सम्प्रदाय भेद नहीं।





