विस्तृत उत्तर
पिशाच योनि जीवन भर किए गए अत्यंत क्रूर, कुटिल और अधर्मी आचरण का परिणाम है। शास्त्रों में इसके लिए अनेक पाप बताए गए हैं: अत्यधिक अनैतिकता, व्यसन, पर-स्त्री गमन, मानसिक विक्षिप्तता या उन्माद की अवस्था में मृत्यु, छल-कपट से जीविका चलाना, दूसरों का धन हरना, स्त्रियों, बालकों, वृद्धों और असहाय रोगियों की संपत्ति छीनना, दान का संकल्प लेकर मुकर जाना, झूठी गवाही देकर निर्दोषों को दंडित करवाना, आश्रितों का अकारण त्याग, स्वामी या अन्नदाता के साथ विश्वासघात, दूसरों के घरों में आग लगाना, विष देना, प्राणियों की निरर्थक हिंसा करना, वेदों, शास्त्रों, गुरु और देवताओं की निंदा करना तथा पाखंडी आचरण करना।
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