📖
विस्तृत उत्तर
पितृ तर्पण का संबंध शरीर और वंश से इसलिए है क्योंकि सपिण्ड का अर्थ ही एक मूल शरीर, रक्त या वंश से जुड़े व्यक्ति हैं। श्राद्धकर्ता की देह में पूर्वजों के तत्त्व उपस्थित माने जाते हैं। पितृकुल की सात पीढ़ियों तक एक ही पिण्ड का प्रभाव माना गया है। इसलिए तर्पण केवल मृत पूर्वज की स्मृति नहीं, बल्कि शरीर, रक्त, वंश और सूक्ष्म ऊर्जा के संबंध को संतुलित करने का शास्त्रीय उपाय है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





