विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं के अनुसार घर के पूजा घर में मूर्तियों की संख्या सीमित रखनी चाहिए। मंदिर और घर के पूजा स्थल के नियम भिन्न हैं।
मुख्य नियम
- ▸घर के मंदिर में अत्यधिक मूर्तियाँ नहीं रखनी चाहिए — यह भीड़भाड़ पूजा की एकाग्रता और ऊर्जा दोनों को प्रभावित करती है।
- ▸एक ही देवता की दो समान मूर्तियाँ नहीं रखनी चाहिए।
शास्त्रीय निषेध (श्लोकानुसार)
प्राचीन शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है:
- ▸दो शिवलिंग एक साथ न रखें
- ▸तीन गणेश मूर्तियाँ न रखें (गणेश की विषम संख्या वर्जित)
- ▸दो शंख एक साथ न रखें
- ▸तीन दुर्गा मूर्तियाँ न रखें
- ▸दो शालिग्राम न रखें
- ▸दो गोमती चक्र न रखें
विशेष देवता नियम
- ▸गणेश जी — विषम संख्या (1, 3) में न रखें, 2 रखना शुभ।
- ▸शिव जी — केवल 1 मूर्ति/शिवलिंग रखें।
- ▸हनुमान जी — केवल 1 मूर्ति रखें।
- ▸माँ दुर्गा/देवी — 3 की संख्या में न रखें।
मूर्ति का आकार: 2 इंच से कम और 9 इंच से अधिक की मूर्ति घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए। बड़ी मूर्तियाँ मंदिरों/गर्भगृहों के लिए उपयुक्त हैं।
व्यावहारिक सुझाव: जितने देवताओं की आप नियमित पूजा कर सकें, उतनी ही मूर्तियाँ रखें। पूजा न हो पाने वाली मूर्तियाँ रखना अशुभ माना जाता है।





