विस्तृत उत्तर
अखंड दीपक (अखंड ज्योति) अर्थात निरंतर जलता हुआ दीपक — यह अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है, परंतु इसके लिए कुछ शर्तें और सावधानियां आवश्यक हैं।
शास्त्रीय महत्व
- 1स्कंद पुराण में अखंड दीप का विशेष महत्व बताया गया है — यह ज्ञान, भक्ति और दैवी कृपा का प्रतीक है।
- 2शिव पुराण में दीप दान और अखंड दीप को मोक्षदायक बताया गया है।
- 3मंदिरों में अखंड ज्योति सदियों से जलती है — नाथद्वारा, वैष्णो देवी, ज्वालामुखी आदि प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
घर में अखंड दीपक — नियम
- 1संकल्प — अखंड ज्योति जलाने से पहले संकल्प लें कि कितने दिन (9 दिन, 21 दिन, 40 दिन) जलाएंगे।
- 2घी का दीपक — शुद्ध गाय के घी का दीपक सर्वोत्तम। सरसों तेल भी स्वीकार्य।
- 3बत्ती — सूती बत्ती उपयोग करें। बत्ती निरंतर ठीक करते रहें।
- 4स्थान — पूजा स्थल में स्थिर, सुरक्षित स्थान पर रखें।
- 5ज्योति बुझने न दें — यदि अखंड ज्योति का संकल्प लिया है तो बुझने न दें। बुझने पर पुनः संकल्प लेकर जलाएं।
सावधानियां
- 1अग्नि सुरक्षा — सबसे महत्वपूर्ण। ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। रात में सोते समय विशेष ध्यान रखें।
- 2बच्चों/पालतू जानवरों से सुरक्षित स्थान पर।
- 3हवा से बचाव — ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा का झोंका न आए।
यदि अखंड दीपक संभव न हो
- ▸प्रतिदिन सुबह-शाम दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ और पर्याप्त है।
- ▸अखंड दीपक की बाध्यता नहीं है — भाव से जलाया गया सामान्य दीपक भी फलदायी है।





