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पूजा विधि📜 धर्मसिंधु, शिव पुराण, पद्म पुराण2 मिनट पठन

पूजा घर में बासी फूल कब तक रख सकते हैं

संक्षिप्त उत्तर

भगवान को चढ़ाए गए फूल (निर्माल्य) अगले दिन की पूजा से पहले हटा दें। बासी फूलों से पूजा निषेध है। हटाए गए फूल तुलसी/पीपल की जड़ में रखें या बहते जल में प्रवाहित करें। शिवलिंग पर बेलपत्र सूखने तक रख सकते हैं।

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विस्तृत उत्तर

शास्त्रों के अनुसार भगवान को अर्पित किए गए फूल 'निर्माल्य' कहलाते हैं और इनके विषय में स्पष्ट नियम बताए गए हैं।

मुख्य नियम

  1. 1सामान्य नियम — भगवान को चढ़ाए गए फूल अगले दिन की पूजा से पहले हटा देने चाहिए। बासी या मुरझाए फूलों से पूजा करना निषेध है।
  1. 1शिव पूजा में विशेष नियम — शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ा हुआ बेलपत्र तब तक नहीं हटाना चाहिए जब तक वह पूर्णतः सूख न जाए। सूखे बेलपत्र को पुनः चढ़ाना भी कुछ परंपराओं में स्वीकार्य माना गया है, परंतु यह मत विवादित है।
  1. 1विष्णु पूजा में — तुलसी दल यदि सूख भी जाए तो विष्णु भगवान के चरणों से स्वयं नहीं हटाना चाहिए; जब स्वतः गिर जाए तब हटाएं — ऐसी मान्यता पद्म पुराण में मिलती है।
  1. 1निर्माल्य का विसर्जन — हटाए गए फूलों को कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। इन्हें तुलसी के पौधे या पीपल के वृक्ष की जड़ में रखें, अथवा बहते जल में प्रवाहित करें।

व्यावहारिक मार्गदर्शन

  • प्रतिदिन पूजा से पहले पुराने फूल हटाकर ताजे फूल अर्पित करें।
  • यदि प्रतिदिन ताजे फूल उपलब्ध न हों, तो अक्षत (अखंडित चावल) से पूजा करें।
  • बासी फूल रखने से पूजा स्थल की पवित्रता और ऊर्जा प्रभावित होती है।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, शिव पुराण, पद्म पुराण
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