विस्तृत उत्तर
पूजा घर में कृत्रिम (प्लास्टिक/कपड़े के) फूल रखने के विषय में शास्त्रीय और परंपरागत दृष्टिकोण स्पष्ट है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण — वर्जित
- 1षोडशोपचार पूजा में 'पुष्प' (फूल) एक उपचार है। शास्त्रों में पुष्प से तात्पर्य ताजे, सुगंधित, प्राकृतिक फूलों से है जो प्राणयुक्त हों।
- 1कृत्रिम फूलों में प्राण नहीं — शास्त्रीय दृष्टि से भगवान को जीवित और प्राणयुक्त वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। कृत्रिम फूलों में कोई प्राण, सुगंध या प्राकृतिक ऊर्जा नहीं होती।
- 1भाव का महत्व — पूजा में भाव (devotion) सर्वोपरि है। प्लास्टिक का फूल भाव का प्रतीक नहीं बन सकता क्योंकि उसमें त्याग (ताजा फूल तोड़कर लाना) और समर्पण का भाव नहीं है।
सजावट के लिए — सशर्त अनुमत
- 1सजावट हेतु — पूजा घर की सजावट के लिए कृत्रिम फूलों की मालाएं या लताएं दीवारों पर लगाई जा सकती हैं, परंतु इन्हें मूर्ति पर या भगवान को अर्पित नहीं करना चाहिए।
- 1माला के रूप में — कृत्रिम फूलों की माला मूर्ति पर नहीं, बल्कि पूजा घर के द्वार या फ्रेम पर सजावट के लिए लगा सकते हैं।
विकल्प (जब ताजे फूल न मिलें)
- 1तुलसी दल — सदैव उपलब्ध और सर्वश्रेष्ठ।
- 2बेलपत्र — शिव पूजा में।
- 3दूर्वा — गणेश पूजा में।
- 4अक्षत (अखंडित चावल) — फूल के विकल्प के रूप में सर्वमान्य।
- 5सूखे फूल — कुछ परंपराओं में सूखे गुलाब की पंखुड़ियां स्वीकार्य हैं।





