विस्तृत उत्तर
पूजा घर में पर्दा लगाना न केवल अनुमत है बल्कि शास्त्रीय परंपरा और मंदिर पद्धति के अनुसार उचित भी माना जाता है।
पर्दा लगाने के पक्ष में तर्क
- 1विश्राम काल — मंदिर परंपरा में भगवान के विश्राम काल (दोपहर और रात्रि) में पट बंद किए जाते हैं। घर में भी पर्दा लगाकर यह परंपरा निभाई जा सकती है।
- 1शयन आरती के बाद — रात्रि में शयन आरती के बाद पर्दा बंद करना भगवान के विश्राम का सम्मान है।
- 1स्वच्छता और सुरक्षा — पर्दा धूल, कीट और अनावश्यक स्पर्श से मूर्तियों की रक्षा करता है।
- 1गोपनीयता — पूजा के समय एकाग्रता बनी रहती है।
- 1वास्तु दृष्टि — कुछ वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार पूजा घर में पर्दा नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है।
पर्दा लगाने के नियम
- 1रंग — लाल, पीला, केसरिया या सफेद रंग का पर्दा शुभ माना जाता है। काला रंग वर्जित है।
- 2कपड़ा — सूती या रेशमी कपड़ा उत्तम है।
- 3स्वच्छता — पर्दा नियमित रूप से धोएं और बदलें।
- 4पूजा के समय — पूजा करते समय पर्दा खुला रखें।
- 5दोनों समय — सुबह पूजा से पहले पर्दा खोलें, रात सोने से पहले बंद करें।
कब न लगाएं
- ▸यदि पूजा घर पूर्णतः बंद कमरा है (दरवाजे वाला), तो अतिरिक्त पर्दा आवश्यक नहीं।
- ▸पर्दा इतना मोटा न हो कि वायु संचार रुक जाए।





