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पूजा नियम📜 धर्मशास्त्र, पूजा शिष्टाचार परंपरा2 मिनट पठन

पूजा घर में पैर फैलाकर बैठने से क्या दोष लगता है?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा घर में पैर फैलाकर बैठना देवताओं का अनादर है — पूजा फल में कमी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठें। पैर कभी मूर्ति की ओर न करें।

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विस्तृत उत्तर

हाँ, पूजा घर में पैर फैलाकर बैठना अशुभ और देवताओं का अपमान माना जाता है।

दोष

  1. 1देवताओं का अनादर — पैर शरीर का सबसे निचला अंग हैं। देवताओं की ओर पैर करना या फैलाकर बैठना उनका अपमान माना जाता है।
  2. 2पूजा फल में कमी — अनादर भाव से की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
  3. 3नकारात्मक ऊर्जा — पैर फैलाकर बैठने से ऊर्जा का सही प्रवाह बाधित होता है।

सही बैठने की विधि

  • पद्मासन (कमल आसन) — सर्वोत्तम, ध्यान और पूजा दोनों के लिए।
  • सुखासन (आलथी-पालथी) — सबसे प्रचलित और सुविधाजनक।
  • वज्रासन — घुटनों पर बैठना, पूजा और प्रणाम के लिए शुभ।
  • पैर कभी मूर्ति/शिवलिंग/ग्रंथ की ओर न करें।
  • सोते समय भी पैर पूजा घर की दिशा में न करें।

अपवाद: शारीरिक अक्षमता (वृद्धावस्था, बीमारी, विकलांगता) होने पर कुर्सी पर बैठकर भी पूजा कर सकते हैं — भक्ति भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, पूजा शिष्टाचार परंपरा
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