विस्तृत उत्तर
इस विषय पर धार्मिक परंपराओं में मत भिन्नता है।
एक दृष्टिकोण — दे सकते हैं
- ▸शास्त्रों में सभी प्राणियों को ईश्वर का अंश माना गया है। प्रसाद को जीवमात्र को देना दया और करुणा का भाव है।
- ▸कई संत परंपराओं में गाय, कुत्ते, पक्षी आदि को प्रसाद देना पुण्यदायक माना जाता है।
- ▸विशेषतः कुत्ते को भैरव का वाहन माना जाता है — काल भैरव पूजा में कुत्ते को भोजन/प्रसाद देना शुभ है।
- ▸गाय को प्रसाद देना सर्वमान्य शुभ कर्म है।
दूसरा दृष्टिकोण — सावधानी बरतें
- ▸कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को अर्पित प्रसाद अत्यंत पवित्र होता है और इसे सीधे जानवरों को देने की बजाय पहले मनुष्यों में वितरित करना चाहिए।
- ▸प्रसाद बचे और कोई मनुष्य न हो तब जानवरों को दिया जा सकता है।
- ▸कुछ लोग मानते हैं कि चढ़ा हुआ प्रसाद (नैवेद्य जो भगवान को अर्पित हो चुका) सीधे जानवरों को देना उचित नहीं।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸गाय को प्रसाद देना सर्वमान्य शुभ है।
- ▸कुत्ते को सामान्य भोजन (रोटी आदि) देना पुण्य है, लेकिन भगवान को अर्पित विशेष नैवेद्य (पंचामृत, चरणामृत आदि) पहले मनुष्यों को दें।
- ▸अन्न नष्ट न करें — बचे प्रसाद को गाय, कुत्ते, पक्षी आदि को दे सकते हैं।
ध्यान दें: इस विषय पर कोई कठोर शास्त्रीय निषेध नहीं मिलता। सबसे महत्वपूर्ण भाव (intention) है — दया और सेवा भाव से जीवों को खिलाना सदैव शुभ है।





