विस्तृत उत्तर
राजा बलि ने भगवान वामन को अपने पैरों के नाप से तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया था। भगवान वामन नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित भृगुकच्छ पहुँचे, जहाँ महाराजा बलि का विशाल यज्ञ चल रहा था। वहाँ भगवान ने भिक्षा के रूप में बलि से केवल तीन पग भूमि मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को यह दान देने से रोका क्योंकि वे पहचान गए थे कि वामन साक्षात् भगवान विष्णु हैं। लेकिन बलि ने सत्य से पीछे हटने से इनकार किया। जब भगवान वामन ने त्रिविक्रम रूप धारण किया, तो पहले पग में पृथ्वी और अधोलोक, दूसरे पग में ऊर्ध्व लोक नाप लिए। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर बलि ने अपना सिर भगवान को अर्पित किया ताकि उनका वचन झूठा न हो।
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