विस्तृत उत्तर
राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात इसलिए नहीं मानी क्योंकि वे अपने सत्य, दान-वचन और धर्म से पीछे हटना नहीं चाहते थे। शुक्राचार्य ने उन्हें बताया था कि वामन कोई साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि साक्षात् भगवान विष्णु हैं, और यह दान देने से उनका सर्वस्व चला जाएगा। फिर भी बलि ने कहा कि वे प्रह्लाद के पौत्र हैं और एक बार ब्राह्मण को वचन देने के बाद अपने सत्य से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि याचक स्वयं विष्णु ही क्यों न हों और इसमें उनके प्राण ही क्यों न चले जाएं, तब भी वे अपना वचन निभाएँगे। इसी सत्यनिष्ठा और आत्म-समर्पण के कारण भगवान वामन उनसे प्रसन्न हुए और उन्हें सुतल लोक का राज्य दिया।
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