विस्तृत उत्तर
भूमण्डल की सप्तद्वीप संरचना एक अत्यंत सटीक और गणितीय पूर्णता लिए हुए व्यवस्था है। यह सम्पूर्ण भूलोक सात विशाल वृत्ताकार द्वीपों और उन्हें घेरने वाले सात महासागरों में विभक्त है। भूमण्डल की यह ज्यामितीय संरचना इस प्रकार है कि प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती द्वीप से आकार में ठीक दोगुना विशाल है और प्रत्येक द्वीप एक विशिष्ट द्रव से भरे हुए महासागर द्वारा घिरा हुआ है। जम्बू द्वीप एक लाख योजन का है और प्रत्येक बाहरी द्वीप दोगुना बड़ा है — प्लक्ष दो लाख, शाल्मलि चार लाख, कुश आठ लाख, क्रौंच सोलह लाख, शाक बत्तीस लाख और पुष्कर चौसठ लाख योजन। इसी प्रकार प्रत्येक महासागर भी अपने भीतर वाले द्वीप के बराबर विस्तार का होता है। इस प्रकार भूमण्डल का कुल विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) होता है। इन सात महासागरों ने सम्पूर्ण भू-मण्डल को वलयाकार रूप में एक के बाद एक आच्छादित कर रखा है।
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