विस्तृत उत्तर
सत्यलोक भौतिक सृष्टि की अन्तिम सीमा है क्योंकि इसके ठीक ऊपर भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच की सीमारेखा समाप्त हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माण्ड के आवरण इस प्रकार हैं — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार। इन आवरणों से युक्त यह सम्पूर्ण भौतिक ब्रह्माण्ड एक अण्ड (कोश) में बंद है। सत्यलोक इस अण्ड का सर्वोच्च बिंदु है। इसके ठीक पार आवरणों को पार करने के पश्चात शाश्वत वैकुण्ठ ग्रहों से युक्त चिदाकाश का आरम्भ होता है। प्रत्येक आवरण अपने पिछले आवरण से दस गुना अधिक विस्तृत है और सत्यलोक से वैकुण्ठ तक की दूरी दो करोड़ बासठ लाख योजन है। इस प्रकार सत्यलोक वह अन्तिम पड़ाव है जहाँ से आगे भौतिकता समाप्त हो जाती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




