विस्तृत उत्तर
सत्यलोक जाने से तत्काल मोक्ष नहीं मिलता। यह क्रम मुक्ति का मार्ग है। देवयान मार्ग से सत्यलोक पहुँचने पर जीव को तुरन्त परब्रह्म में लीन होकर कैवल्य मोक्ष प्राप्त नहीं होता। वह जीव सत्यलोक में ब्रह्मा जी के सान्निध्य में कल्पों तक निवास करता है और वहाँ पूर्ण ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करता है। जब ब्रह्मा जी की सौ वर्ष की आयु पूर्ण होती है और महाप्रलय का समय आता है तब वे सभी मुक्त आत्माएँ ब्रह्मा जी के साथ ही शाश्वत वैकुण्ठ में प्रवेश करके अंतिम मोक्ष प्राप्त करती हैं। रामानुजाचार्य ने भी यह सिद्ध किया कि सत्यलोक के निवासी महाकल्प के अन्त में मोक्ष को ही प्राप्त करते हैं।
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