विस्तृत उत्तर
तुलसी पूजा प्रातः और संध्या दोनों समय की जाती है। संध्या पूजा विशेष शुभ।
शाम की तुलसी पूजा विधि
- 1समय — सूर्यास्त के आसपास (संध्या दीपक समय)।
- 2दीपक — तुलसी के पौधे के पास घी/सरसों तेल का दीपक जलाएं।
- 3जल — तुलसी को जल अर्पित करें (शाम को पत्ते न तोड़ें — यह नियम है)।
- 4कुमकुम/हल्दी — तुलसी के तने पर लगाएं।
- 5अक्षत — चावल अर्पित करें।
- 6परिक्रमा — तुलसी की 3/5/7 परिक्रमा करें।
- 7मंत्र:
देवी त्वं निर्मिता पूर्वं अर्चिता सर्वदेवतैः।
नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये।।'
या सरल: 'ॐ तुलस्यै नमः'
- 1प्रार्थना — परिवार कल्याण, सुख-शांति।
नियम
- ▸शाम को पत्ते न तोड़ें — सबसे महत्वपूर्ण नियम।
- ▸रविवार/एकादशी — पत्ते तोड़ना वर्जित (कुछ परंपरा)।
- ▸तुलसी विवाह — कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह।
स्पष्टीकरण: तुलसी पूजा विष्णु भक्ति परंपरा का अनिवार्य अंग। शाम दीपक + तुलसी पूजा = सर्वाधिक प्रचलित संध्या कर्म।





