ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
दैनिक आचार📜 तुलसी पूजा परंपरा, विष्णु भक्ति2 मिनट पठन

शाम को तुलसी पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

संध्या समय: दीपक जलाएं + जल अर्पित + कुमकुम/अक्षत + 3-7 परिक्रमा + 'ॐ तुलस्यै नमः'। शाम को पत्ते न तोड़ें (नियम)। दीपक + तुलसी = सबसे प्रचलित संध्या कर्म। कार्तिक में तुलसी विवाह।

📖

विस्तृत उत्तर

तुलसी पूजा प्रातः और संध्या दोनों समय की जाती है। संध्या पूजा विशेष शुभ।

शाम की तुलसी पूजा विधि

  1. 1समय — सूर्यास्त के आसपास (संध्या दीपक समय)।
  2. 2दीपक — तुलसी के पौधे के पास घी/सरसों तेल का दीपक जलाएं।
  3. 3जल — तुलसी को जल अर्पित करें (शाम को पत्ते न तोड़ें — यह नियम है)।
  4. 4कुमकुम/हल्दी — तुलसी के तने पर लगाएं।
  5. 5अक्षत — चावल अर्पित करें।
  6. 6परिक्रमा — तुलसी की 3/5/7 परिक्रमा करें।
  7. 7मंत्र:
देवी त्वं निर्मिता पूर्वं अर्चिता सर्वदेवतैः।

नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये।।'

या सरल: 'ॐ तुलस्यै नमः'

  1. 1प्रार्थना — परिवार कल्याण, सुख-शांति।

नियम

  • शाम को पत्ते न तोड़ें — सबसे महत्वपूर्ण नियम।
  • रविवार/एकादशी — पत्ते तोड़ना वर्जित (कुछ परंपरा)।
  • तुलसी विवाह — कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह।

स्पष्टीकरण: तुलसी पूजा विष्णु भक्ति परंपरा का अनिवार्य अंग। शाम दीपक + तुलसी पूजा = सर्वाधिक प्रचलित संध्या कर्म।

📜
शास्त्रीय स्रोत
तुलसी पूजा परंपरा, विष्णु भक्ति
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

तुलसीशामपूजाविधि

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

शाम को तुलसी पूजा कैसे करें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको दैनिक आचार से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर तुलसी पूजा परंपरा, विष्णु भक्ति पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।