विस्तृत उत्तर
शंख हिंदू पूजा में सदियों से प्रयुक्त होता रहा है। इसकी ध्वनि का वैज्ञानिक अध्ययन कुछ शोधकर्ताओं ने किया है।
शंख की आवृत्ति (Frequency) — शंख की ध्वनि लगभग 100 से 500 हर्ट्ज़ (Hz) के बीच होती है — यह श्रव्य ध्वनि की निम्न तरंग दैर्घ्य वाली श्रेणी है। कुछ शंखों से इन्फ्रासाउंड (20 Hz से नीचे) भी उत्पन्न होता है।
मस्तिष्क पर प्रभाव — 100-500 Hz की ध्वनि श्रवण तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क के limbic system को उत्तेजित करती है जो भावनाओं और स्मृति से संबंधित है। शोध बताते हैं कि कम आवृत्ति की ध्वनियाँ विश्राम (relaxation) और ध्यान (meditation) अवस्था उत्पन्न करने में सहायक हो सकती हैं।
सकारात्मक पर्यावरण प्रभाव — एक जर्मन शोध के अनुसार शंखनाद के बाद वायु में मौजूद रोगजनक कीटाणुओं की संख्या में कमी देखी गई, हालाँकि यह शोध सीमित पैमाने पर था।
नासा और शंख — यह दावा कि NASA ने शंखनाद को 'ब्रह्मांड की मूल ध्वनि' माना — इसकी पुष्टि नहीं है और इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं प्रस्तुत करना चाहिए।
सावधानी — शंख की ध्वनि के लाभों पर बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक शोध अभी उपलब्ध नहीं है। जो शोध हुए हैं वे सीमित हैं। शंख की ध्वनि से मानसिक शांति अनुभव होती है — इसे ध्वनि-चिकित्सा (sound therapy) के संदर्भ में समझा जा सकता है।





