विस्तृत उत्तर
मंदिरों में प्रयुक्त होने वाली घंटियाँ एक विशेष धातु मिश्रण (कांसा — ताँबा और टिन) से बनाई जाती हैं। इनकी ध्वनि का मस्तिष्क पर प्रभाव कुछ शोधकर्ताओं की रुचि का विषय रही है।
घंटी की आवृत्ति — मंदिर की घंटी की ध्वनि 200 से 2000 Hz के बीच होती है, जिसमें 'सुर' के अलावा उच्च आवृत्ति के 'ओवरटोन' भी होते हैं। पारंपरिक भारतीय घंटियों में विशेष रूप से 432 Hz या उसके निकट की मुख्य आवृत्ति होती है जिसे कुछ ध्वनि-चिकित्सक 'सकारात्मक आवृत्ति' मानते हैं — हालाँकि यह दावा पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।
ध्वनि की अवधि — घंटी की ध्वनि बजाने के बाद लगभग 7 सेकंड तक गूँजती रहती है। कुछ शोध बताते हैं कि इस समयावधि में मस्तिष्क के दाएँ और बाएँ गोलार्ध में समन्वय (synchronization) उत्पन्न होता है — जो ध्यान की प्रारंभिक अवस्था जैसी होती है।
शांति का अनुभव — घंटी की ध्वनि मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करती है, जो ध्यान-अभ्यास का आधार है। इसीलिए दुनिया भर की धार्मिक परंपराओं में — चर्च की बेल, बौद्ध मंदिर की घंटी और हिंदू मंदिर की घंटी — सबमें यह प्रचलन है।
सावधानी — विशिष्ट आवृत्तियों के दावे और मस्तिष्क synchronization के प्रमाण अभी वैज्ञानिक रूप से पूर्णतः स्थापित नहीं हैं। मानसिक शांति का अनुभव वास्तविक है, किंतु इसके precise वैज्ञानिक तंत्र पर अधिक शोध अपेक्षित है।





