विस्तृत उत्तर
वामदेव शिव के पंचमुख (पांच मुखों) में से एक है। यह शिव का सौम्य, शांत और परम कल्याणकारी स्वरूप है।
वामदेव का स्वरूप
- 1वामदेव मुख उत्तर दिशा की ओर है।
- 2यह शिव का 'स्थिति' (पालन/संरक्षण) शक्ति का प्रतीक है।
- 3वामदेव = 'वाम' (सुंदर/कोमल) + 'देव' = सुंदर/सौम्य देवता।
- 4तैत्तिरीय आरण्यक में वामदेव को 'शांतिकारक' कहा गया है।
- 5इस रूप में शिव के वर्ण को श्वेत/चंद्र समान उज्ज्वल बताया गया है।
वामदेव रूप की प्रसन्नता की साधना
- 1सात्विक उपासना:
वामदेव सौम्य रूप है — अतः सात्विक पूजा, शुद्ध मंत्र जप, शांतिपूर्ण ध्यान से प्रसन्न होते हैं।
- 1वामदेव गायत्री:
वामदेव मुख से संबंधित मंत्र का जप:
ॐ वामदेवाय नमः' — इस मंत्र का 108 बार जप।
- 1शांति कर्म:
वामदेव रूप शांति, रोग निवारण और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला है। शांति हवन, शांति पूजन इस रूप को प्रसन्न करते हैं।
- 1संगीत और कला:
वामदेव को संगीत, नृत्य और ललित कलाओं से प्रसन्नता होती है। शिव तांडव स्तोत्र और शिव भजन का गायन।
- 1चंद्रमा संबंधित पूजा:
वामदेव चंद्रमा से संबंधित है। सोमवार (सोम = चंद्र) की पूजा, चंद्र अभिषेक (दूध अभिषेक) विशेष रूप से वामदेव को प्रसन्न करता है।
- 1जल तत्व:
वामदेव जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। शिवलिंग पर निरंतर जलधारा (रुद्राभिषेक) वामदेव की कृपा प्रदान करती है।
वामदेव कृपा से प्राप्ति
- ▸मानसिक शांति और रोग निवारण
- ▸कलात्मक प्रतिभा का विकास
- ▸दांपत्य सुख (वामदेव अर्धनारीश्वर तत्व से जुड़ा)
- ▸सौंदर्य और आकर्षण
- ▸चंद्र दोष निवारण
शिव के पंचमुख: सद्योजात (पश्चिम), वामदेव (उत्तर), अघोर (दक्षिण), तत्पुरुष (पूर्व), ईशान (ऊर्ध्व)।





