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शिव पूजा📜 शिव पुराण, लिंग पुराण, भागवत पुराण (समुद्र-मंथन प्रसंग)2 मिनट पठन

शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

शिवलिंग पर जल क्यों: हलाहल-शीतलता (समुद्र-मंथन — देवताओं ने जल अर्पित किया)। जल = शिव का प्रिय तत्त्व (लिंग पुराण)। पंचतत्त्व पूजा। जल = सोम = चंद्रमा (शिव के मस्तक पर)। सततधारा-परंपरा — निरंतर जल-प्रवाह।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के पीछे शास्त्रों में कई महत्त्वपूर्ण कारण दिए गए हैं।

1हलाहल-शीतलता का प्रतीक

भागवत पुराण और शिव पुराण के समुद्र-मंथन प्रसंग के अनुसार — जब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए हलाहल विष पी लिया, उनका कंठ जलने लगा। देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। इसी की स्मृति में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।

2जल = शिव का प्रिय तत्त्व

लिंग पुराण: शिव स्वयं 'जलेश्वर' हैं। जल उनका प्रिय तत्त्व है। 'आपो हि ष्ठा...' (ऋग्वेद 10.9.1) — जल देवता स्वरूप है।

3पंचतत्त्व पूजा

शिवलिंग पाँच तत्त्वों का प्रतीक है। जल (जलतत्त्व) चढ़ाना = पाँच तत्त्वों में से एक तत्त्व की पूजा।

4जल = सोम = चंद्रमा

शिव के मस्तक पर चंद्रमा है। जल = सोम-तत्त्व। शिवलिंग पर जल अर्पण = सोम-तत्त्व की पूजा = शिव के चंद्र-स्वरूप की आराधना।

5ताम्रपात्र-परंपरा

शिव मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर ताम्रपात्र (जलधारी) रखा जाता है जिससे निरंतर जल-धारा प्रवाहित होती है — यह 'सततधारा अभिषेक' है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, लिंग पुराण, भागवत पुराण (समुद्र-मंथन प्रसंग)
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