विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के पीछे शास्त्रों में कई महत्त्वपूर्ण कारण दिए गए हैं।
1हलाहल-शीतलता का प्रतीक
भागवत पुराण और शिव पुराण के समुद्र-मंथन प्रसंग के अनुसार — जब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए हलाहल विष पी लिया, उनका कंठ जलने लगा। देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। इसी की स्मृति में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।
2जल = शिव का प्रिय तत्त्व
लिंग पुराण: शिव स्वयं 'जलेश्वर' हैं। जल उनका प्रिय तत्त्व है। 'आपो हि ष्ठा...' (ऋग्वेद 10.9.1) — जल देवता स्वरूप है।
3पंचतत्त्व पूजा
शिवलिंग पाँच तत्त्वों का प्रतीक है। जल (जलतत्त्व) चढ़ाना = पाँच तत्त्वों में से एक तत्त्व की पूजा।
4जल = सोम = चंद्रमा
शिव के मस्तक पर चंद्रमा है। जल = सोम-तत्त्व। शिवलिंग पर जल अर्पण = सोम-तत्त्व की पूजा = शिव के चंद्र-स्वरूप की आराधना।
5ताम्रपात्र-परंपरा
शिव मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर ताम्रपात्र (जलधारी) रखा जाता है जिससे निरंतर जल-धारा प्रवाहित होती है — यह 'सततधारा अभिषेक' है।





