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विस्तृत उत्तर
सोमपा या सोमवन्त वे पितर कहलाते हैं जिन्होंने जीवन में सोमयज्ञ संपन्न किया। वे यज्ञकर्ता पितरों की श्रेणी से संबंधित हैं। इस वर्ग का आधार केवल जन्म या वर्ण नहीं, बल्कि जीवन में किए गए यज्ञीय कर्म हैं। इसलिए सोमपा पितर यज्ञ-प्रधान धर्माचरण के प्रतीक माने गए हैं।
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