विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक का सबसे भौतिक, भौगोलिक और प्रत्यक्ष केंद्र सुमेरु (Mount Meru) पर्वत की चोटी को माना जाता है। श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के सोलहवें अध्याय में सुमेरु पर्वत और उसके आसपास के क्षेत्रों का अत्यंत विस्तृत वर्णन मिलता है। इस वर्णन के अनुसार सुमेरु पर्वत कमल के आकार के इस ब्रह्मांड का मध्य भाग है जो जम्बूद्वीप के ठीक मध्य 'इलावृत वर्ष' में स्थित है। यह संपूर्ण इलावृत वर्ष पूरी तरह से स्वर्ण से निर्मित है। सुमेरु पर्वत की संरचना अत्यंत विशाल है — इसका आधार 32,000 योजन चौड़ा है, यह पृथ्वी के नीचे 16,000 योजन तक गहराई में धंसा हुआ है और पृथ्वी के ऊपर इसका विस्तार 84,000 योजन की ऊँचाई तक है। इसी सुमेरु पर्वत के सर्वोच्च शिखर पर साक्षात स्वर्ग की राजधानियां और देवताओं के निवास स्थान स्थित हैं। सुमेरु पर्वत के चारों ओर कुरंग, कुरर, कुसुम्भ, त्रिकूट आदि कई पर्वत श्रृंखलाएं कमल की पंखुड़ियों के समान व्यवस्थित हैं।
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