विस्तृत उत्तर
सुतल लोक को वैकुंठ जैसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि वहाँ भगवान विष्णु की साक्षात् उपस्थिति है। यद्यपि सुतल लोक भौतिक ब्रह्मांड का हिस्सा है और पृथ्वी के नीचे स्थित है, परंतु भगवान विष्णु की प्रत्यक्ष उपस्थिति के कारण यह वैकुंठ के समान ही पवित्र और वंदनीय हो गया है। सुतल लोक में भगवान नारायण अपने चतुर्भुज रूप में हाथ में गदा धारण किए हुए महाराजा बलि के द्वार पर रक्षक के रूप में खड़े रहते हैं। भागवत में भगवान यह वचन भी देते हैं कि प्रह्लाद और बलि सुतल लोक में नित्य उनके दर्शन करेंगे, और भगवान के इस नित्य दर्शन के परमानंद से उनके असुर-सुलभ सारे कर्म-बंधन अपने आप कट जाएंगे। इसी कारण सुतल लोक वैकुंठ के समान पूजनीय माना जाता है।
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