विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में भौतिक सुख और भक्ति दोनों इसलिए हैं क्योंकि यह बिल-स्वर्ग भी है और भगवान विष्णु की प्रत्यक्ष उपस्थिति से पवित्र भी है। यहाँ का भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएँ, प्राकृतिक सौंदर्य और विलासिता स्वर्ग से भी अधिक उन्नत और समृद्ध बताई गई हैं। सुतल लोक में महाराजा बलि अपनी प्रजा और संबंधियों के साथ स्वर्ग से भी श्रेष्ठ ऐश्वर्य का उपभोग कर रहे हैं। साथ ही वे भगवान की अविरल भक्ति में लीन हैं और निरंतर भगवान वामन की पूजा तथा उनकी लीलाओं का स्मरण करते हैं। भगवान वामन स्वयं उनके रक्षक और द्वारपाल हैं। इसलिए सुतल लोक में भौतिक वैभव के साथ अनन्य भगवद-भक्ति भी विद्यमान है।
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