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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार सुतल लोक भौतिक सुखों से सम्पन्न कर्म-भोग का स्थान है, मोक्ष का नहीं। इसमें इसे दानवों और दैत्यों का ऐसा लोक बताया गया है जहाँ भौतिक सुख स्वर्ग से भी अधिक है, परंतु यह स्पष्ट किया गया है कि यह कर्म-भोग का स्थान है, मोक्ष का नहीं। यद्यपि सुतल लोक भौतिक ब्रह्मांड का हिस्सा है, पर भगवान विष्णु की साक्षात् उपस्थिति और महाराजा बलि की भक्ति के कारण यह वैकुंठ के समान पवित्र और वंदनीय हो गया है।
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