विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक में बुढ़ापा और रोग नहीं होने के पीछे शास्त्रों में स्पष्ट कारण बताए गए हैं। स्वर्लोक में मिलने वाला शरीर पंचभौतिक नहीं होता बल्कि सात्त्विक ऊर्जा से निर्मित 'भोग-देह' होता है जो पृथ्वी के स्थूल शरीर से सर्वथा भिन्न है। यह दिव्य शरीर भूख, प्यास और बुढ़ापे से मुक्त होता है। इसके अतिरिक्त सभी द्वीपों में रहने वाले लोग पूर्णतः स्वर्गिक जीवन व्यतीत करते हैं जहाँ बुढ़ापा, रोग और मानसिक कष्ट नहीं होते। वे मानसिक दृढ़ता और शारीरिक शक्ति में पूर्णता प्राप्त होते हैं। सुधर्मा सभा में प्रवेश करते ही शोक, जरा (बुढ़ापा), थकान, मानसिक चिंता और भय का पूर्णतः नाश हो जाता है। इस प्रकार स्वर्लोक का संपूर्ण वातावरण ही स्वास्थ्य और आनंद प्रदायक है।
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