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विस्तृत उत्तर
तलातल का सुख अस्थायी है क्योंकि यह पुण्य कर्मों के फल से प्राप्त भोग-सुख है। तलातल में जीव हजारों वर्षों तक दिव्य मदिरा, सुंदरी स्त्रियों और ऐश्वर्य का भोग करते हैं, पर उनका आध्यात्मिक स्तर शून्य होता है। वे माया, भोग और अहंकार में बँधे रहते हैं। जब उनके पुण्यों का क्षय हो जाता है, तो उन्हें पुनः पृथ्वी लोक, यानी भूर्लोक, पर जन्म लेना पड़ता है। इसलिए तलातल का सुख भले ही स्वर्ग से भी अधिक प्रतीत हो, वह शाश्वत नहीं है।
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