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विस्तृत उत्तर
त्रिपुर दहन में ब्रह्मा जी की दो महत्वपूर्ण भूमिकाएँ बताई गई हैं। पहले उन्होंने तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली की तपस्या से प्रसन्न होकर तीन अजेय नगरों का वरदान दिया और मय दानव को उनके निर्माण का आदेश दिया। बाद में त्रिपुर दहन के समय वे भगवान शिव के दिव्य रथ के सारथी बने। अमृत-कुण्ड प्रसंग में भी ब्रह्मा जी ने बछड़े का रूप धारण किया, जबकि भगवान विष्णु ने गाय का रूप लेकर उस कुण्ड का अमृत पी लिया।
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