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विस्तृत उत्तर
तृतीया श्राद्ध में कर्ता स्नान और शुद्ध वस्त्र के बाद दक्षिणाभिमुख होकर पितरों को लक्ष्य करके संकल्प करता है। संकल्प में तिथि, गोत्र, पितृ नाम और श्राद्ध का उद्देश्य स्मरण किया जाता है।
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