विस्तृत उत्तर
ऊनी आसन (कंबल का आसन) शास्त्रों में सभी आसनों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कंबल के आसन पर बैठकर जप-तप और पूजा-पाठ करना सर्वोत्तम फलदायी है।
मुख्य कारण — ऊर्जा संरक्षण: ब्रह्माण्ड पुराण में स्पष्ट बताया गया है कि पूजा-जप करने वाले व्यक्ति के शरीर में एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति का संचय होता है। बिना आसन के खाली भूमि पर बैठकर पूजा करने से यह शक्ति पृथ्वी में समाहित हो जाती है और साधक को कोई लाभ नहीं मिलता। ऊनी कपड़ा विद्युत का कुचालक है — यह शरीर और भूमि के बीच ऊर्जा-अवरोधक का काम करता है।
विभिन्न फल: लाल रंग का ऊनी आसन माँ दुर्गा, लक्ष्मी और हनुमानजी की आराधना के लिए विशेष उत्तम माना जाता है। सामान्य ऊनी/कंबल आसन पर बैठकर किसी भी देवता की पूजा या मंत्र जप से कर्म-सिद्धि होती है।
ब्रह्माण्ड पुराण का विधान: 'वंसासने तु दरिद्राम' — बाँस के आसन से दरिद्रता, 'धरण्याम दुख संभूति' — नंगी भूमि पर बैठने से दुख। इसलिए आसन अनिवार्य है और ऊनी आसन सर्वश्रेष्ठ।





