विस्तृत उत्तर
सभी पुराण सत्यलोक को भौतिक ब्रह्माण्ड का सर्वोच्च शिखर मानते हैं तथापि विभिन्न पुराणों के दृष्टिकोण में सूक्ष्म भिन्नताएँ हैं। विष्णु पुराण सत्यलोक को भौगोलिक और गणितीय दृष्टि से प्रस्तुत करता है — 88,000 ऊर्ध्वरेता मुनियों की संख्या और सूर्य के प्रकाश के निस्तेज होने पर बल देता है। भागवत पुराण दार्शनिक और भक्ति-प्रधान दृष्टि से सत्यलोक और शाश्वत वैकुण्ठ के बीच का भेद स्पष्ट करता है और निवासियों की करुणा का अनूठा चित्रण करता है। शिव पुराण में ब्रह्मा जी शिव की आज्ञा से सत्यलोक में हैं और सृष्टि के आरंभ में अविद्या के पाँच आवरण का प्रसंग है। ब्रह्माण्ड पुराण सत्यलोक को आकाश-तत्व प्रधान और द्वैत-भाव से मुक्त बताता है। वायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मत सत्यलोक की बहु-आयामी प्रकृति को व्यक्त करते हैं।
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