विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में सत्यलोक की वास्तुकला के वर्णन में विचक्षण सिंहासन का उल्लेख है। अपराजिता भवन के भीतर विभु नामक विशाल प्रांगण है। इस प्रांगण के भीतर विचक्षण नामक सिंहासन है। विचक्षण का अर्थ है अत्यंत विवेकशील या सर्वज्ञ। इस सिंहासन पर अमितौजस नामक आसन है। अमितौजस का अर्थ है असीम तेज वाला। इसी विचक्षण सिंहासन के अमितौजस आसन पर भगवान ब्रह्मा विराजमान रहते हैं। यह वर्णन सत्यलोक की असाधारण और अलौकिक वास्तुकला का एक भाग है जो इस लोक की परम दिव्यता को व्यक्त करता है।
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