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विस्तृत उत्तर
विचित्रभवन यममार्ग के १६ नगरों में से एक है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि आत्मा तीसरे मास में नगेन्द्रभवन, चौथे मास में गंधर्वपुर, पांचवें महीने में क्रौंचपुर, छठे महीने में क्रूरपुर और बाद में विचित्रभवन पहुँचती है। विचित्रभवन का राजा विचित्र है। इस यात्रा में आत्मा पुराने सुखों और परिवार को याद करती है, श्राद्ध-पिंडदान से मिलने वाली सहायता पर निर्भर रहती है और यदि परिजन पिंडदान नहीं करते तो वह भूख-प्यास से तड़पती हुई विलाप करती है।
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