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विस्तृत उत्तर
विष्णु की श्वास से सृष्टि बनने का भाव यह है कि उनकी प्राण-ऊर्जा ने अव्यक्त जगत को गति दी। पहले आदिनाद ने कारण-जल में कंपन उत्पन्न किया, लेकिन उस कंपन को ब्रह्मांडीय गति विष्णु की प्रथम श्वास से मिली। जैसे ही श्वास बाहर आई, कालचक्र चला और स्थिर कारण-जल में हलचल शुरू हुई। इसी से प्रकाश-अंधकार, दिशा, पंचभूत और आगे ब्रह्मांडीय रचना का क्रम प्रकट हुआ।
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