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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में उच्चारित मंत्रों और आहुतियों को अग्नि और विश्वेदेव अन्य पितरों तक ले जाते हैं। यदि पूर्वज किसी भी योनि में चले गए हों, तो मंत्र और गोत्र-नाम के प्रभाव से अर्पित अन्न उनके अनुरूप रूप धारण कर उन तक पहुँचता है। इस प्रकार विश्वेदेव श्राद्ध के संप्रेषण तंत्र में मध्यस्थ और वाहक की भूमिका निभाते हैं।
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