विस्तृत उत्तर
यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की यात्रा का मार्ग है। गरुड़ पुराण के प्रेतखण्ड में इस यात्रा का विशद वर्णन मिलता है। यह यात्रा मात्र एक भौतिक दूरी नहीं है, बल्कि आत्मा के कर्म-शोधन और सांसारिक मोह के विच्छेदन की एक क्रूर प्रक्रिया है। यममार्ग की कुल दूरी ८६,००० योजन है, जिसे जीवात्मा को ३४८ दिनों में तय करना होता है। आत्मा प्रतिदिन लगभग २००.५ योजन की दूरी वायु के वेग से बलपूर्वक तय करती है। यह मार्ग अत्यंत दुर्गम, अंधकारमय और भयंकर है। इस मार्ग पर न विश्राम के लिए वृक्षों की छाया है, न प्यास बुझाने के लिए जल की एक बूंद है, और न प्राणों की रक्षा के लिए कोई अन्न है।
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