विस्तृत उत्तर
यमराज की सभा में कोई कर्म इसलिए छिप नहीं सकता क्योंकि भगवान चित्रगुप्त अग्रसंधानी नामक अलौकिक पंजिका रखते हैं, जिसमें ब्रह्मांड के प्रत्येक प्राणी के जन्म से लेकर मृत्यु तक के एक-एक क्षण का शुभ और अशुभ कर्म अंकित रहता है। इसके पीछे श्रवण और श्रवणी देवों की शक्तिशाली और अदृश्य गुप्तचर व्यवस्था भी कार्य करती है। मनुष्य बंद कमरों में, अंधकार में या एकांत में जो भी पाप या पुण्य करता है, श्रवण और श्रवणी देव उसे उसी क्षण देख और सुन लेते हैं और उसे भगवान चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुंचाते हैं।
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