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तंत्र षट्कर्म — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 6 प्रश्न

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तंत्र षट्कर्म

तंत्र में आकर्षण कर्म कैसे किया जाता है?

'आकर्षित करना' — राजसिक। सात्विक: व्यक्तित्व, अवसर, ईश्वर आकर्षण ('क्लीं')। अनुचित: बलपूर्वक = पाप। 'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः' = सात्विक। विधि विवरण अनुचित।

आकर्षणकर्मकैसे
तंत्र षट्कर्म

तंत्र साधना में अभिचार कर्म क्या होता है?

दूसरों को हानि (मंत्र/यंत्र)। मारण/उच्चाटन/विद्वेषण = अभिचार। तामसिक — गंभीर पाप। करने वाले = 3-10 गुना बुरा (कर्म)। पूर्णतः वर्जित। केवल शांति कर्म। अनैतिक+अवैध।

अभिचारकर्मक्या
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में विद्वेषण कर्म का क्या उद्देश्य होता है?

'भेद/विभाजन' — दो में शत्रुता। तामसिक (निकृष्ट)। गंभीर कर्म बंधन। सात्विक: स्वयं का बुराई से अलग = वैराग्य। सामान्य: पूर्णतः वर्जित। केवल शांति = उचित।

विद्वेषणकर्मउद्देश्य
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में मारण कर्म क्या है और इसका दुष्प्रभाव क्या होता है?

सर्वनिकृष्ट + सर्ववर्जित। दुष्प्रभाव: गंभीर कर्म बंधन, प्रतिघात (परिवार कष्ट), पागलपन, साधना पतन, IPC 302/307 (कानूनी अपराध)। 'जो मारे = वो मरे।' शांति = एकमात्र धर्म। विधि कभी न दें।

मारणकर्मक्या
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में स्तंभन कर्म किस परिस्थिति में किया जाता है?

'रोकना' — शत्रु गति/वाक्/क्रिया। कोर्ट/विवाद, रोग प्रगति। राजसिक। बगलामुखी = स्तंभन देवी ('ह्लीं')। सामान्य: बगलामुखी जप मान्य। षट्कर्म = गुरु। संवेदनशील।

स्तंभनकर्मपरिस्थिति
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में उच्चाटन कर्म का प्रभाव कैसे काम करता है?

'उखाड़ना/हटाना' — स्थान/पद/मोह से। तामसिक (कर्म फल)। सात्विक: स्वयं की बुराई हटाना। सामान्य = केवल शांति कर्म। उच्चाटन = गुरु दीक्षित, कर्म बंधन, वर्जित। विधि गोपनीय।

उच्चाटनकर्मप्रभाव

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