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नरक प्रश्नोत्तरी — 151 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित नरक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 151 प्रश्न

पाप एवं दंड

ऋण लेकर न लौटाने वाले की क्या गति होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार ऋण लेकर न लौटाने वाला वैतरणी नदी में गिरता है। यमलोक में उसका मांस काटकर ऋणदाता को दिया जाता है और उसे रौरव नरक की यातना भोगनी पड़ती है।

ऋणकर्जवैतरणी
नरक एवं परलोक

पापी एक नरक से दूसरे नरक में क्यों जाते रहते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार जिसने अनेक पाप किए हैं, उसे हर पाप के लिए अलग नरक भोगना पड़ता है। एक नरक समाप्त होने पर अगले पाप का फल अगले नरक में मिलता है — यह क्रम पाप-क्षय होने तक चलता है।

नरकपापीएक से दूसरा नरक
नरक एवं परलोक

गोघाती को वैतरणी में डुबोने का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गोघाती को विशेष रूप से वैतरणी नदी में फेंका जाता है जहाँ घड़ियाल, विषधर सर्प और गिद्ध उसे नोचते हैं। इसके अलावा 'महावीचि' नरक में रक्त के गड्ढे में डाला जाता है और काँटे चुभाए जाते हैं।

गोघातीगौहत्यावैतरणी
नरक एवं परलोक

ब्राह्मण होकर मद्य पीने वाले को कौन सा नरक मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मद्यपान करने वाला ब्राह्मण विशेष रूप से वैतरणी नरक में डाला जाता है। इसके अलावा 'विलेपक' नरक में उसे जलती आग में फेंका जाता है और अगले जन्म में उसके दाँत काले होते हैं तथा वह भेड़िये-कुत्ते की योनि पाता है।

ब्राह्मणमद्यपाननरक
नरक एवं परलोक

वैतरणी नदी सभी नरकों में सर्वाधिक कष्टप्रद क्यों है?

गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी रक्त, मवाद और मांस के कीचड़ से भरी सौ योजन चौड़ी नदी है, जिसमें विशालकाय ग्राह और गिद्ध भरे हैं। सभी महापापियों को विशेष रूप से इसी में फेंका जाता है, इसीलिए यह सर्वाधिक कष्टप्रद मानी गई है।

वैतरणीनरकयमलोक
आत्मा और मोक्ष

गरुड़ पुराण में कितने नरक बताए गए हैं

भागवत पुराण (5.26) में 28, गरुड़ पुराण में 21-28 नरक वर्णित हैं। प्रमुख: तामिस्र, रौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, वैतरणी आदि — प्रत्येक विशिष्ट पाप से संबंधित। हिंदू धर्म में नरक अस्थायी है — पाप भोगकर पुनर्जन्म होता है। उद्देश्य: सत्कर्म की प्रेरणा।

नरकगरुड़ पुराण28 नरक
आत्मा और मोक्ष

स्वर्ग और नरक क्या है हिंदू धर्म में

स्वर्ग = पुण्य कर्मों का फल (दिव्य सुख, इंद्रलोक) — अस्थायी, पुण्य क्षीण होने पर पुनर्जन्म (गीता 9.21)। नरक = पाप कर्मों का दंड (यातनाएं) — अस्थायी। दोनों मोक्ष नहीं हैं। मोक्ष (जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति) ही परम लक्ष्य।

स्वर्गनरकदेवलोक

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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