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कर्म योग — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

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भगवद गीता

गीता में कर्म योग क्या है?

कर्म योग = फल की आसक्ति त्याग कर कर्तव्य-पालन। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' (2.47)। कोई एक क्षण कर्म-रहित नहीं रह सकता। निष्काम कर्म = मुक्ति। सकाम कर्म = बंधन। 'योगः कर्मसु कौशलम्' — कर्म में कुशलता ही योग।

कर्म योगनिष्काम कर्मगीता
हिंदू दर्शन

गृहस्थ जीवन में मोक्ष प्राप्ति कैसे संभव

गृहस्थ मोक्ष संभव और श्रेष्ठ — राजा जनक प्रमाण। गीता 3.4-7 — निष्काम कर्मी गृहस्थ अकर्मण्य संन्यासी से श्रेष्ठ। उपाय: निष्काम कर्म, ईश्वरार्पण, भक्ति, सेवा, स्वाध्याय, कमल पत्र जैसे संसार में रहो पर चिपको मत।

गृहस्थमोक्षकर्म योग
हिंदू दर्शन

भगवद्गीता के अनुसार निष्काम कर्म क्या है

निष्काम कर्म = फल की आसक्ति बिना कर्तव्य कर्म। गीता 2.47 — कर्म करो, फल में आसक्ति मत रखो। कर्म ईश्वर को अर्पित (9.27), सुख-दुख में समान (2.48)। आलस्य नहीं — पूर्ण समर्पण से कर्म करो, फल ईश्वर पर छोड़ो। परिणाम: चित्त शुद्धि → मोक्ष।

निष्काम कर्मगीताकर्म योग
आत्मा और मोक्ष

कर्म योग से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है गीता अनुसार

कर्म योग: गीता 2.47 — कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो। कर्म ईश्वर को अर्पित (9.27), सुख-दुख में समान (2.48), स्वधर्म पालन (3.35)। निष्काम कर्म → चित्त शुद्धि → ज्ञान → मोक्ष। कमल पत्र जैसे — कर्म करो पर लिप्त मत हो (5.10)।

कर्म योगनिष्काम कर्मगीता
गीता ज्ञान

गीता का ज्ञान क्या है?

गीता के मुख्य संदेश: आत्मा अमर है (शरीर नष्ट हो पर आत्मा नहीं); निष्काम कर्म करो — फल की चिंता छोड़ो; ज्ञान, भक्ति, कर्म और ध्यान — चारों मार्ग ईश्वर तक ले जाते हैं। अंतिम उपदेश: 'सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' — केवल ईश्वर की शरण में जाओ।

गीता ज्ञानकर्म योगभक्ति योग

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।