विस्तृत उत्तर
भगवद्गीता और सनातन शास्त्रों में मोक्ष प्राप्ति के चार प्रमुख मार्ग बताए गए हैं — ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग और राज योग (सांख्य योग)।
ज्ञान योग — इस मार्ग में साधक आत्मा, परमात्मा और माया के वास्तविक स्वरूप को समझकर मुक्ति की ओर बढ़ता है। 'मैं ब्रह्म हूँ' — इस बोध की प्राप्ति ही ज्ञान मार्ग का लक्ष्य है। यह मार्ग बौद्धिक और वैचारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है और मुख्यतः शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन से जुड़ा है।
भक्ति योग — इस मार्ग में ईश्वर के प्रति निष्काम प्रेम और समर्पण के द्वारा मुक्ति प्राप्त होती है। श्रीकृष्ण, राम या शिव की भक्ति, नाम जप, कीर्तन, पूजा और शरणागति — ये सब इसके अंग हैं। यह मार्ग सबसे सुगम और हृदयग्राही माना जाता है।
कर्म योग — बिना फल की आसक्ति के अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना ही कर्म योग है। गीता में श्रीकृष्ण ने इसे सर्वाधिक विस्तार से समझाया है। सेवा, परोपकार और निष्काम कर्म इसके आधार हैं।
राज योग — इसमें अष्टांग योग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — के द्वारा मन को पूर्णतः वश में कर आत्म-साक्षात्कार प्राप्त किया जाता है।
ये चारों मार्ग एक-दूसरे के विरोधी नहीं; अनेक संत इनका समन्वय करते हैं। व्यक्ति की प्रवृत्ति के अनुसार कोई भी एक मार्ग प्रमुख हो सकता है।





