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राहु केतु प्रश्नोत्तरी — 11 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित राहु केतु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 11 प्रश्न

ज्योतिष

मंत्र जप से कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें?

मंत्र: महामृत्युंजय सवा लाख+हवन (सर्वाधिक प्रभावी)। 'ॐ नमः शिवाय'। राहु: 'ॐ रां राहवे नमः' 18,000। केतु: 'ॐ कें केतवे नमः' 17,000। विष्णु सहस्रनाम। अन्य: त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा, रुद्राभिषेक, नाग पंचमी। ज्योतिषी से कुण्डली परामर्श।

कालसर्पराहु केतुमंत्र
लोक

राहु केतु कैसे बने?

स्वर्भानु का सिर राहु और धड़ केतु बना, क्योंकि अमृत पीने के बाद विष्णु ने उसे काट दिया।

राहु केतुस्वर्भानुसुदर्शन चक्र
फलश्रुति

महामृत्युंजय अनुष्ठान से कालसर्प और नवग्रह दोष कैसे दूर होते हैं?

कालसर्प दोष, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के क्रूर प्रभावों को शांत करने के लिए महामृत्युंजय अनुष्ठान को सर्वोत्कृष्ट वैदिक उपचार माना गया है।

कालसर्प दोषशनि साढ़ेसातीराहु केतु
अष्टधातु

अष्टधातु से ग्रह शांति कैसे होती है?

अष्टधातु की मूर्ति पूजा या अष्टधातु का कड़ा/अंगूठी धारण करने से सभी नौ ग्रहों के दुष्प्रभाव शांत होते हैं — विशेष रूप से राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।

ग्रह शांतिराहु केतुअशुभ प्रभाव
विशेष अभिषेक द्रव्य और उनके फल

तिल के तेल से अभिषेक करने से क्या होता है?

तिल के तेल से अभिषेक करने पर ज्ञान वृद्धि और शनि, राहु, केतु के दोषों की शांति होती है — यह ग्रह दोष निवारण का विशेष द्रव्य है।

तिल तेल अभिषेकशनि दोषराहु केतु
भय-निवारण और रक्षा

कालसर्प दोष से अज्ञात भय क्यों होता है?

कालसर्प दोष में राहु (अतृप्त इच्छाएं) और केतु (कर्म-बंधन) के बीच जीवन पिसता रहता है जिससे अज्ञात भय, मानसिक अशांति और दुःस्वप्न (सांप दिखना) की समस्या होती है।

अज्ञात भयकालसर्प दोषमानसिक अशांति
सर्प सूक्त

सर्प सूक्त का पाठ क्यों करना चाहिए?

सर्प सूक्त का पाठ इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह समस्त सर्प-शक्तियों को शांत करता है और राहु-केतु के लौकिक-अलौकिक दोनों प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।

सर्प सूक्त पाठराहु केतुनकारात्मक प्रभाव
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

कालसर्प दोष में सभी ग्रह कहाँ फँस जाते हैं?

कालसर्प दोष में जन्म-कुंडली के सभी सात ग्रह राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) के मध्य एक ओर फँस जाते हैं।

कालसर्प दोषग्रहराहु केतु
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

राहु और केतु कालसर्प दोष में क्या भूमिका निभाते हैं?

राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) कर्म-फल के दण्ड-अधिकारी हैं — इनके मध्य सभी ग्रहों के फँसने से कालसर्प दोष बनता है।

राहु केतुकालसर्प दोषछाया ग्रह
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

कालसर्प योग क्या होता है?

कालसर्प योग वह ग्रह-स्थिति है जब जन्म-कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य एक ओर फँस जाते हैं — यह नाग-पाश (सर्प-बंधन) कहलाता है और जीवन में बाधा, संघर्ष और मानसिक अस्थिरता देता है।

कालसर्प योगराहु केतुजन्म कुंडली
शिव पूजा

शिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?

राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।

राहु केतुग्रह दोषनिवारण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।