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हलाहल विष प्रश्नोत्तरी — 7 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित हलाहल विष विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 7 प्रश्न

शिव नाम महिमा

शिव को नीलकंठ क्यों कहते हैं

समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने संसार की रक्षा के लिए पी लिया। पार्वती ने कंठ पकड़ा जिससे विष नीचे नहीं उतरा — कंठ नीला हो गया। इसीलिए शिव 'नीलकंठ' कहलाए।

नीलकंठसमुद्र मंथनहलाहल विष
लोक

हलाहल विष क्या था?

हलाहल समुद्र मंथन से निकला प्रलयंकारी विष था, जिसे शिव जी ने पीकर सृष्टि बचाई।

हलाहल विषनीलकंठशिव
शिव का बाह्य स्वरूप और प्रतीक

नीलकंठ नाम का क्या अर्थ है?

समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष शिव ने अपने कंठ में धारण किया → कंठ नीला पड़ा → नाम 'नीलकंठ'। यह संसार के दुखों और नकारात्मकता को स्वयं में समाहित कर समाज की रक्षा करने की असीम करुणा का प्रतीक है।

नीलकंठहलाहल विषकरुणा
पौराणिक रहस्य

प्रदोष में शिव पूजा क्यों होती है?

समुद्र मंथन से निकले जहर को शिव जी ने इसी समय पीकर दुनिया को बचाया था और 'आनंद तांडव' किया था। इसलिए इस समय शिव पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है।

समुद्र मंथनहलाहल विषआनंद तांडव
दार्शनिक आधार

माता मनसा को 'विषहरी' क्यों कहा जाता है?

कैलाश पर रहकर माता मनसा ने भगवान शिव से जहर (विष) को अमृत में बदलने की गुप्त विद्या सीखी थी। विष का प्रभाव नष्ट करने की शक्ति के कारण ही उन्हें 'विषहरी' कहा जाता है।

विषहरीहलाहल विषनागमाता
पौराणिक कथा

समुद्र मंथन में भगवान शिव के 'नीलकंठ' स्वरूप का प्रदोष व्रत से क्या संबंध है?

समुद्र मंथननीलकंठहलाहल विष
शिव महिमा

समुद्र मंथन में हलाहल विष कैसे निकला?

समुद्र मंथन में देवताओं और असुरों ने मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग से क्षीरसागर का मंथन किया। सबसे पहले कालकूट नामक हलाहल विष निकला जो इतना भयंकर था कि उसकी ज्वाला से सम्पूर्ण सृष्टि का नाश हो सकता था।

समुद्र मंथनहलाहल विषकालकूट

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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