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कार्तिकेय कैसे सम्बन्धित प्रश्न(12)

कार्तिकेय कैसे पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 12 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।  कार्तिकेय को मुरुगन, स्कंद, षण्मुख के रूप में भी जाना जाता है।

कार्तिकेय क्यों (7)कार्तिकेय कैसे (12)
कार्तिकेय कैसे पर पूछे गए प्रश्न
  1. छह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय को दूध कैसे पिलाया?
  2. शिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?
  3. शिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?
  4. भगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?
  5. स्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?
कार्तिकेय कथा

छह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय को दूध कैसे पिलाया?

शरवण वन में प्रकट हुए छह शिशुओं का रुदन सुनकर कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ आईं। उनके मन में मातृत्व भाव जागा और उन्होंने एक-एक बालक को अपने स्तन से दूध पिलाया। इसीलिए कार्तिकेय, कृत्तिका-पुत्र 'कार्तिकेय' कहलाए।

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शिव पूजा विधि

शिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?

शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।

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कार्तिकेय कथा

शिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।

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अवतार की कथा

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?

कार्तिकेय जन्म: सामान्य तरीके से नहीं। भगवान शिव के तेज से → अग्निदेव और गंगाजी के माध्यम से → छह कृत्तिका नक्षत्रों (स्त्रियों) ने धारण किया → पार्वती ने छह बच्चों को एकाकार करके स्कंद को गोद में लिया।

#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव गंगा
दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति

स्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?

स्कंद पुराण (काशी खंड, 71वाँ अध्याय): दुर्गमासुर ने वेद चुराए → देवताओं की शक्ति क्षीण → आद्याशक्ति का आह्वान → देवी पार्वती ने महाभयंकर रूप धारण कर दुर्गमासुर का वध किया → देवताओं-ऋषियों ने घोषणा: यह रौद्र रूप 'दुर्गा' कहलाएगा।

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कार्तिकेय और गणेश जन्म

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

ब्रह्मवैवर्त पुराण: पार्वती का 'पुण्यक व्रत' → विष्णु शिशु रूप में अवतरित → शनि की दृष्टि से मस्तक भस्म → विष्णु गरुड़ पर गजराज का मस्तक लाए।

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कार्तिकेय और गणेश जन्म

लिंग पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

लिंग पुराण: देवताओं ने दैत्यों के यज्ञों में विघ्न के लिए प्रार्थना की → शिव ने स्वयं दिव्य गजमुख स्वरूप प्रकट किया (हाथ में त्रिशूल और पाश) → विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों उपाधि दी।

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कार्तिकेय और गणेश जन्म

पद्म पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

पद्म पुराण: पार्वती ने उबटन से हाथी मुख वाली प्रतिमा बनाई → गंगा जल में प्रवाहित किया → विशालकाय देवपुरुष (गांगेय) बन गया → ब्रह्मा जी ने 'गणेश' नाम दिया।

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कार्तिकेय और गणेश जन्म

शिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

शिव पुराण: पार्वती ने उबटन से बालक बनाया → शिव रोके गए → शिव ने मस्तक काटा → पार्वती का क्रोध → नंदी हाथी का सिर लाए → शिव ने जोड़कर जीवित किया और 'गणपति' नाम दिया। हाथी मस्तक = परम ज्ञान, पूर्व मस्तक = अहंकार नाश।

#गणेश जन्म#शिव पुराण#उबटन
कार्तिकेय और गणेश जन्म

भगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।

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स्कंद पुराण: वाडवाग्नि कथा

सरस्वती ने वाडवाग्नि से विश्व की रक्षा कैसे की?

शिव परामर्श: केवल सरस्वती ही इसे धारण कर सकती हैं। ब्रह्मा की आज्ञा से सरस्वती ने कुंवारी कन्या का रूप लिया, स्वर्ण पात्र में अग्नि रखी, नदी रूप में प्रकट हुईं और पश्चिम बहते हुए पुष्कर से होते हुए महासागर में अग्नि विसर्जित कर दी।

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उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की पूजा से गर्भ-वास (पुनर्जन्म) से मुक्ति कैसे मिलती है?

यह लिंग अण्डाकार है जो सृष्टि के मूल का प्रतीक है। इसकी पूजा से साधक जन्म के रहस्य को जानकर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है और उसे पुनः गर्भ-वास (जन्म) का कष्ट नहीं सहना पड़ता।

#पुनर्जन्म मुक्ति#गर्भ-वास मुक्ति#सायुज्य मोक्ष
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