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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 13

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इतनी वस्तुएँ तो हमने आज प्राप्त कर लीं और अब इस मनोरथको प्राप्त (पूरा) कर लेंगे।,इतना धन तो हमारे पास है ही, इतना धन फिर हो जायगा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इतनी वस्तुएँ तो हमने आज प्राप्त कर लीं और अब इस मनोरथको प्राप्त (पूरा) कर लेंगे।,इतना धन तो हमारे पास है ही, इतना धन फिर हो जायगा।

English Meaning

"This has been gained by me today; this desire of mine I shall fuffil; this is mine and this wealth also shall be mine in future."

"This has been gained by me today; this desire of mine I shall fuffil; this is mine and this wealth also shall be mine in future."

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