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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 14

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि | ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं।

English Meaning

"That enemy has been slain by me; and others also I shall slay. I am the lord. I enjoy. I am perfect, powerful and happy."

"That enemy has been slain by me; and others also I shall slay. I am the lord. I enjoy. I am perfect, powerful and happy."

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