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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 15

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया | यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हम धनवान् हैं, बहुत-से मनुष्य हमारे पास हैं, हमारे समान और कौन है? हम खूब यज्ञ करेंगे, दान देंगे और मौज करेंगे -- इस तरह वे अज्ञानसे मोहित रहते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हम धनवान् हैं, बहुत-से मनुष्य हमारे पास हैं, हमारे समान और कौन है? हम खूब यज्ञ करेंगे, दान देंगे और मौज करेंगे -- इस तरह वे अज्ञानसे मोहित रहते हैं।

English Meaning

"I am rich and born in a noble family. Who else is equal to me? I shall perform sacrifices. I shall give (charity). I shall rejoice," thus deluded by ignorance.

"I am rich and born in a noble family. Who else is equal to me? I shall perform sacrifices. I shall give (charity). I shall rejoice," thus deluded by ignorance.

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