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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 16

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

अनेकचित्तविभ्रान्ता मोहजालसमावृताः | प्रसक्ताः कामभोगेषु पतन्ति नरकेऽशुचौ

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कामनाओंके कारण तरह-तरहसे भ्रमित चित्तवाले, मोह-जालमें अच्छी तरहसे फँसे हुए तथा पदार्थों और भोगोंमें अत्यन्त आसक्त रहनेवाले मनुष्य भयङ्कर नरकोंमें गिरते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

कामनाओंके कारण तरह-तरहसे भ्रमित चित्तवाले, मोह-जालमें अच्छी तरहसे फँसे हुए तथा पदार्थों और भोगोंमें अत्यन्त आसक्त रहनेवाले मनुष्य भयङ्कर नरकोंमें गिरते हैं।

English Meaning

Bewildered by many a fancy, entangled in the snare of delusion, addicted to the gratification of lust, they fall into a foul hell.

Bewildered by many a fancy, entangled in the snare of delusion, addicted to the gratification of lust, they fall into a foul hell.

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